Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 6 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 6

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 6
Shloka
मङ्गल्यं ब्राह्मणस्य स्यात्क्षत्रियस्य बलान्वितम्। वैश्यस्य धनसंयुक्तं शूद्रस्य तु जुगुप्सितम्॥

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Subject
चर्णानुसार नामकररण
Meaning
(ब्राह्मणस्य मङ्गल्यं स्यात्) ब्राह्मण का नाम शुभत्व - श्रेष्ठत्व भावबोधक शब्दों से [जैसे - ब्रह्मा, विष्णु, मनु, शिव, अग्नि, वायु, रवि, आदि] रखना चाहिए (क्षत्रियस्य) क्षत्रिय का (बलान्वितम्) बल-पराक्रम-भावबोधक शब्दों से [जैसे—इन्द्र, भीष्म, भीम, सुयोधन, नरेश, जयेन्द्र, युधिष्ठिर आदि] (वैश्यस्य घनसंयुक्तम्) वैश्य का धन-ऐश्वर्यंभाव-बोधक शब्दों से [जैसे-वसुमान्, वित्तेश, विश्वम्भर, धनेश आदि], और (शूद्रस्य तु) शूद्र का (जुगुप्सितम्) रक्षणीय, पालनीय भावबोधक शब्दों से [जैसे-सुदास अकिंचन] नाम रखना चाहिए । अर्थात् व्यक्ति के वर्णसापेक्ष गुणों के आधार पर नामकरण करना चाहिए॥६॥