Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 51 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 51

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 51
Shloka
अकारं चाप्युकारं च मकारं च प्रजापतिः। वेदत्रयान्निरदुहद्भूर्भुवः स्वरितीति च॥

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Subject
'ओ३म्' एवं गायत्री की उत्पत्ति एवं फल
Meaning
(प्रजापतिः) परमात्मा ने (अकारम् उकारं च मकार) ओ३म् शब्द के 'अ' 'उ' और 'म्' अक्षरों को [अ+उ+म् = प्रोम्] (च) तथा (भूः भुवः स्वः इति) 'भूः' 'भुवः' 'स्वः' गायत्री मन्त्र की इन तीन व्याहृतियों को (वेदत्रयात् निरदुहत्) तीनों वेदों से दुहकर साररूप में निकाला है॥५१॥