Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 49 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 49

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 49
Shloka
ब्रह्मनः प्रणवं कुर्यादादावन्ते च सर्वदा। स्रवत्यनोंकृतं पूर्वं परस्ताच्च विशीर्यति॥

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Subject
वेदाध्ययन के आद्यन्त में प्ररणवोच्चारण का विधान
Meaning
(सवंदा ब्रह्मरणः आदौ च अन्ते प्ररणवं कुर्यात्) [शिष्य ] सदैव वेद पढ़ने के आरम्भ और अन्त में 'ओ३म्' का उच्चारण करे (पूर्वम् अनोंकृतम्) आरंभ में ओंकार का उच्चारण न करने से (स्रवति) पढ़ा हुआ बिखर जाता [ = भलीभाँति ग्रहण नहीं हो पाता] (च) और (पुरस्तात् विशीर्यति) बाद में 'ओ३म्' का उच्चारण न करने से पढ़ा हुआ स्थिर नहीं रहता॥४९॥