Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 48 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 48

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 48
Shloka
अध्येष्यमाणं तु गुरुर्नित्यकालं अतन्द्रितः। अधीष्व भो इति ब्रूयाद्विरामोऽस्त्विति चारमेत्॥

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Subject
अध्ययन के प्रारंभ एवं समाप्ति की विधि
Meaning
(गुरु: नित्यकालम्) गुरु सदैव पढ़ाते समय (अतन्द्रितः) आलस्यरहित होकर (अध्येष्यमाणं तु) पढ़ने वाले शिष्य को ('भो अधीष्व' इति ब्रूयात्) 'हे शिष्य पढ़ो' इस प्रकार कहे (च) और ('विराम: अस्तु' इति आरत्) 'अब बस करो' ऐसा कहकर पढ़ाना समाप्त करे॥४८॥