Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 47 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 47

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 47
Shloka
व्यत्यस्तपाणिना कार्यं उपसंग्रहणं गुरोः। सव्येन सव्यः स्प्रष्टव्यो दक्षिणेन च दक्षिणः॥

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Subject
गुरु के अभिवादन की विधि
Meaning
(गुरोः उपसंग्रहणम्) गुरु के चरणों का स्पर्श (व्यत्यस्तपारिगना कार्यम्) हाथों को अदल-बदल करके [ प्ररणामकर्ता का बायां हाथ नीचे रहकर गुरु के बायें पैर का स्पर्श करे और उसके ऊपर से दायां हाथ दायें चरण को स्पर्श करे] करना चाहिए (सव्येन सव्यः) बायें हाथ से बांया चरण (च) और (दक्षिणेन दक्षिण:) दायें हाथ से दायां पैर का (स्प्रष्टव्यः) स्पर्श करना चाहिए॥४७॥