Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 46 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 46

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 46
Shloka
ब्रह्मारम्भेऽवसाने च पादौ ग्राह्यौ गुरोः सदा। संहत्य हस्तावध्येयं स हि ब्रह्माञ्जलिः स्मृतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(ब्रह्मारम्भे च अवसाने) वेद पढ़ने के आरम्भ और समाप्ति पर (सदा गुरोः पादौ ग्राह्यौ) सदैव गुरु के दोनों चरणों को छूकर नमस्कार करे [२४७] (हस्तौ संहत्य अध्येयम्) दोनों हाथ जोड़कर [गुरु से ] पढ़ना चाहिये (सः हि ब्रह्माञ्जलिः स्मृतः) इसी [हाथ जोड़ने] को 'ब्रह्माञ्जलि' कहा जाता है॥४६॥