Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 44 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 44

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 44
Shloka
उपनीय गुरुः शिष्यं शिक्षयेच्छौचं आदितः। आचारं अग्निकार्यं च संध्योपासनं एव च॥

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Subject
ब्रह्मचारी को शिक्षा
Meaning
(गुरुः) गुरु (शिष्यं उपनीय) शिष्य का यज्ञोपवीत संस्कार करके (आदित) पहले (शौचम्) शुद्धि= स्वच्छता से रहने की विधि (आचारम्) सदाचरण और सद्व्यवहार (अग्निकार्यम्) अग्निहोत्र की विधि (संध्योपासनम् एव) और सन्ध्या-उपासना की विधि (शिक्षयेत्) सिखाये॥४४॥