Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 43 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 43

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 43
Shloka
एष प्रोक्तो द्विजातीनां औपनायनिको विधिः। उत्पत्तिव्यञ्जकः पुण्यः कर्मयोगं निबोधत॥

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1 Bhashyas
Subject
उपयन विधि की समाप्ति एवं ब्रह्मचारी के कर्मों का कथन
Meaning
(एषः) यह [२ | ११–४२] (द्विजातीनां उत्पत्तिव्यञ्जक:) द्विजातियों के द्वितीय जन्म को प्रकट करने वाली अर्थात् मनुष्यों को द्विज = ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य बनाने वाली (पुण्यः) कल्याण-कारक (प्रौपनायनिकः विधिः) उपनयन संस्कार की विधि (प्रोक्तः) कही, (कर्मयोगं निबोधत) [अब उपनयन में दीक्षित होने वाले द्विज ब्रह्मचारियों के] कर्त्तव्यों को सुनो -॥४३॥