Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 4 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 4

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 4
Shloka
प्राङ्नाभिवर्धनात्पुंसो जातकर्म विधीयते। मन्त्रवत्प्राशनं चास्य हिरण्यमधुसर्पिषाम्॥

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Subject
जातकर्म संस्कार का विधान
Meaning
(पुंसः) बालक का (जातकर्म) जातकर्म संस्कार (नाभिवर्धनात् प्राक्) नाभि काटने से पहले (विधीयते) किया जाता है (च) और इस संस्कार में (अस्य) इस बालक को (मन्त्रवत्) मन्त्रोच्चारणपूर्वक (हिरण्य-मधु-सर्पिषाम्) सोने की शलाका से (असमान मात्रा में) शहद सुवर्ण, शहद और घी अर्थात् और घी को (प्राशनम्) चटाया जाता है॥४॥