Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 34 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 34

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 34
Shloka
अङ्गुष्ठमूलस्य तले ब्राह्मं तीर्थं प्रचक्षते। कायं अङ्गुलिमूलेऽग्रे देवं पित्र्यं तयोरधः॥

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Subject
आचमन-विधि
Meaning
(अंगुष्ठमूलस्य तले) अंगूठे के मूलभाग के नीचे का स्थान (ब्राह्म तीर्थंप्रचक्षते) ब्राह्मतीर्थ (अंगुलिमूले कालम्) अंगुलियों के मूलभाग का स्थान कायतीर्थ (अग्रे दैवम्) अंगुलियों के अग्रभाग का स्थान दैवतीर्थ, और (तयोः अधः पित्र्यम्) अंगुलियों और अंगूठे का मध्यवर्ती मूलभाग का स्थान पितृतीर्थ (प्रचक्षते) कहा जाता है॥३४॥