Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 31 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 31

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 31
Shloka
नोच्छिष्टं कस्य चिद्दद्यान्नाद्यादेतत्तथान्तरा। न चैवात्यशनं कुर्यान्न चोच्छिष्टः क्व चिद्व्रजेत्॥

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Meaning
(न कस्यचित् + उच्छिष्टं दद्यात्) न किसी को अपना झूठा पदार्थ दे (च) और (तथा एव न अन्तरा अद्यात्) उसी प्रकार न किसी भोजन के बीच आप खावे (न चैव अति-अशनं कुर्यात्) न अधिक भोजन करे (च) और (न उच्छिष्ट: क्वचिद् व्रजेत्) न भोजन किये पश्चात् हाथ मुख धोये विना कहीं इधर-इधर जाय॥३१॥