Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 30 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 30

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 30
Shloka
पूजितं ह्यशनं नित्यं बलं ऊर्जं च यच्छति। अपूजितं तु तद्भुक्तं उभयं नाशयेदिदम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(हि) क्योंकि (पूजितं अशनम्) आदरपूर्वक किया हुआ भोजन (नित्यं बलं च ऊर्ज यच्छति) सदैव बल और स्फूर्ति देने वाला होता है (तु तत् + अपूजितम्) और वह अनादर पूर्वक (भुक्तम्) खाया हुआ (इदम् उभयं नाशयेत्) इन दोनों बल और स्फूर्ति को नष्ट करता है॥३०॥