Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 26 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 26

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 26
Shloka
समाहृत्य तु तद्भैक्षं यावदन्नं अमायया। निवेद्य गुरवेऽश्नीयादाचम्य प्राङ्मुखः शुचिः॥

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1 Bhashyas
Subject
गुरु को भिक्षा-समर्पण
Meaning
(तत् भैक्ष तु समाहृत्य) उस भिक्षा को आवश्यकतानुसार लाकर (यावत् + अन्नम्) जितनी भी वह भोज्य सामग्री हो उसे (अमायया) निष्कपट भाव से (गुरवे निवेद्य) गुरु को निवेदित करके (शुचिः) स्वच्छ होकर (प्राङ्मुख:) पूर्व की ओर मुख करके (आचम्य) आचमन करके (अश्नीयात्) खाये । वह आचार्य के आगे घर देनी, तत्पश्चात् आचार्य जितनी भिक्षा मिले उसमें से कुछ थोड़ा सा अन्न लेके वह सब भिक्षा बालक को दे देवे और वह बालक उस भिक्षा को अपने भोजन के लिए रख छोड़े ॥२६॥