Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 23 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 23

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 23
Shloka
प्रतिगृह्येप्सितं दण्डं उपस्थाय च भास्करम्। प्रदक्षिणं परीत्याग्निं चरेद्भैक्षं यथाविधि॥

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1 Bhashyas
Subject
भिक्षा-विधान
Meaning
(ईप्सितं दण्डं प्रतिगृह्य) ऊपर वरिणत दण्डों में अपने योग्य दण्ड धारण करके (च) और (भास्करं उपस्थाय) सूर्य के सामने खड़ा होके (अग्नि प्रदक्षिणं परीत्य) यज्ञाग्नि की प्रदक्षिणा – परिक्रमा करके (यथाविधि) विधि [अनुसार २ | २४-२५] (भैक्षं चरेत्) भिक्षा मांगे॥२३॥