Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 222 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 222

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 222
Shloka
आचार्ये तु खलु प्रेते गुरुपुत्रे गुणान्विते। गुरुदारे सपिण्डे वा गुरुवद्वृत्तिं आचरेत्॥

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Meaning
(आचार्ये तु खलु प्रेते) आचार्य को यदि मृत्यु हो जाये तो (गुरगान्त्रिा गुरुपुत्रे) गुणवान गुरुपुत्र में (गुरुदारे) गुरुपत्नी में (वा) अथवा (सपिण्डे) गुरु वश वाले योग्य व्यक्ति में (वृत्तिम्) दक्षिणा देने के कत्तंव्य को (गुरुवत्) गुरु के समान (आचरेत्) करे अर्थात् गुरु को मृत्यु हो जाने पर उक्त व्यक्तियों का गुरु के स्थान की दक्षिणा दे दे ॥२२२॥