Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 221 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 221

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 221
Shloka
क्षेत्रं हिरण्यं गां अश्वं छत्रोपानहं आसनम्। धान्यं शाकं च वासांसि गुरवे प्रीतिं आवहेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
[शिष्य यथाशक्ति] (क्षेत्रम्) भूमि (हिरण्यम्) सोना (गाम्) गो (अश्वम्) घोड़ा (छत्र-उपानहम् आसनम्) छाता, जूता, आसन (धान्यम्) अन्न (वासांसि) चस्त्र (वा) अथवा (शाकम्) शाक (गुरवे) गुरु के लिए (प्रीतिम आवहेत्) प्रीतिपूर्वक दक्षिणा में दे ॥२२१॥