Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 220 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 220

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 220
Shloka
न पूर्वं गुरवे किं चिदुपकुर्वीत धर्मवित्। स्नास्यंस्तु गुरुणाज्ञप्तः शक्त्या गुर्वर्थं आहरेत्॥

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Subject
गुरुदक्षिणा का विधान एवं नियम
Meaning
(धर्मवित्) विधि का ज्ञाता शिष्य (स्नास्यन् तु) स्नातक बनने [समावर्तन कराने] की इच्छा होने पर (गुरुरणा+आज्ञप्तः) गुरु से प्रज्ञा प्राप्त करके (शक्त्या) शक्ति के अनुसार (गुर्वर्थम्) गुरु के लिए (ग्राहरेत्) दक्षिणा प्रदान करे (पूर्वं गुरवे किंचित् न उपकुर्वीत) समावर्तन से पहले गुरु को दक्षिरणा के रूप में कुछ न दे ॥२२०॥