Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 22 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 22

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

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Adhyay 2 Shloka 22
Shloka
ऋजवस्ते तु सर्वे स्युरव्रणाः सौम्यदर्शनाः। अनुद्वेगकरा नॄणां सत्वचोऽनग्निदूषिताः॥

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1 Bhashyas
Subject
दण्डों का स्वरूप
Meaning
(ते तु सर्वो) वे सब दण्ड (ऋजव:) सीधे (अन्रणाः) बिना गाँठ वाले (सौम्यदर्शनाः) देखने में प्रिय लगने वाले (नृणां अनुद्वेगकराः) मनुष्यों को बुरे या डरावने न लगने वाले (सत्वच:) छालसहित और (अग्निदूषिताः) बिना जले-झुलसे (स्युः) होने चाहिये॥२२॥