Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 215 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 215

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 215
Shloka
स्त्रियो रत्नान्यथो विद्या धर्मः शौचं सुभाषितम्। विविधानि च शील्पानि समादेयानि सर्वतः॥

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Meaning
(स्त्रियः) उत्तम स्त्री (रत्नानि) नाना प्रकार के रत्न (विचा) विद्या (धर्मः) सत्य (शौचम्) पवित्रता (सुभाषितम्) श्रेष्ठभाषण (च) और (विविधानि शिल्पानि) नाना प्रकार की शिल्पविद्या अर्थात् कारीगरी (सर्वतः समादेयानि) सब देश तथा सब मनुष्यों से ग्रहण करें॥२१५॥