Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 214 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 214

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 214
Shloka
विषादप्यमृतं ग्राह्यं बालादपि सुभाषितम्। अमित्रादपि सद्वृत्तं अमेध्यादपि काञ्चनम्॥

Bhashya

Meaning
(विषात् अपि अमृतं ग्राहयम्) विष से भी अमृत का ग्रहण करना (बालात् अपि सुभाषितम्) बालक से भी उत्तम वचन को ले लेना * (सं० वि० ८५) * और (अमित्रात्, अपि सद् वृत्तम्) वैरी से भी श्रेष्ठ आचरण सीख लेना चाहिए, तथा (अमेध्यात् अपि काञ्चनम्) अशुद्ध स्थान से भी स्वर्ण को प्राप्त कर लेना चाहिए॥२१४॥