Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 197 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 197

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 197
Shloka
आचम्य प्रयतो नित्यं उभे संध्ये समाहितः। शुचौ देशे जपञ् जप्यं उपासीत यथाविधि॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
संध्योपासन का विधान एवं विधि
Meaning
ब्रह्मचारी (नित्यम्) प्रतिदिन (उभे संध्ये) प्रातः और सायं दोनों संध्याकालों में (शुचौ देशे) शुद्ध स्थान में (आचम्य) आचमन करके (प्रयतः) प्रयत्नपूर्वक (समाहितः) एकाग्र होकर (जप्यं जपन् उपासीत) गायत्री का जप करते हुए उपासना करे ॥१९७॥