Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 194 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 194

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 194
Shloka
मुण्डो वा जटिलो वा स्यादथ वा स्याच्छिखाजटः। नैनं ग्रामेऽभिनिम्लोचेत्सूर्यो नाभ्युदियात्क्व चित्॥

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1 Bhashyas
Subject
ब्रह्मचारी के लिए केश-सम्बन्धी तीन विकल्प एवं ग्राम निवास का निषेध
Meaning
ब्रह्मचारी (मुण्ड: वा जटिल: वा स्यात्) चाहे तो सब केश मुंडवाकर रहे चाहे सब केश रखकर रहे (अथवा) या फिर (शिखाजट:) केवल शिखा रखकर [शेष केश मुंडवाकर ] (स्यात्) रहे । (एनम्) इस ब्रह्मचारी को (क्वचित् ग्रामे) किसी स्थान में रहते (सूर्य:) सूर्य (न अभिनिम्लोचेत्) न तो प्रस्त हो (न अभ्युदयात्) न कभी उदय हो अर्थात् प्रमाद के कारण उसके निवास स्थान पर रहते-रहते सूर्य अस्त नहीं होना चाहिए और न ही सोते-सोते सूर्योदय होना चाहिए अपितु उससे पूर्व ही संध्योपासन आदि नित्यकर्मों के लिये वन-प्रदेश में निकल जाना चाहिए [२ । ७६, ७८, ७७, ७६]॥११४॥