Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 193 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 193

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 193
Shloka
यथा खनन्खनित्रेण नरो वार्यधिगच्छति। तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रूषुरधिगच्छति॥

Bhashya

Subject
गुरुसेवा का फल
Meaning
(यथा खनित्रेण खनन् नरः) जैसे फावड़े से खोदता हुआ मनुष्य (वारि अधिगच्छति) जल को प्राप्त होता है (तथा) वैसे (शुश्रूषुः) गुरु की सेवा करने वाला पुरुष (गुरुगतां विद्याम्) गुरुजनों ने जो विद्या प्राप्त की है, उसको (अधि गच्छति) प्राप्त होता है ॥१६३॥