Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 190 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 190

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 190
Shloka
मात्रा स्वस्रा दुहित्रा वा न विविक्तासनो भवेत्। बलवानिन्द्रियग्रामो विद्वांसं अपि कर्षति॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
[मनुष्य को चाहिए कि] (मात्रा स्वस्रा वा दुहित्रा) माता, वह्न अथवा पुत्री के साथ भी (विविक्त+आसनः न भवेत्) एकान्त आसन पर न बैठे या न रहे, क्योंकि (बलवान् इन्द्रियग्राम:) शक्तिशाली इन्द्रियां (विद्वांसम् अपि) विद्वान् = विवेकी व्यक्ति को भी (कर्षति) खींचकर अपने वश में कर लेती हैं ॥१६०॥