Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 19 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 19

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 19
Shloka
कार्पासं उपवीतं स्याद्विप्रस्योर्ध्ववृतं त्रिवृत्। शणसूत्रमयं राज्ञो वैश्यस्याविकसौत्रिकम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वर्णानुसार यज्ञोपवीत
Meaning
(विप्रस्य) ब्राह्मण का (उपवीतम्) यज्ञोपवीत (कार्पासम्) कपास का बना (राज्ञः) क्षत्रिय का (शरणसूत्रमयम्) सन के सूत का बना, और (वैश्यस्य) वैश्य का (आविक सौत्रिकम्) भेड़ की ऊन के सूत का बना (स्यात्) होना चाहिए, वह उपवीत (ऊर्ध्वंवृतम्) दाहिनी ओर से बायीं ओर का बटा हुआ, और (त्रिवृत्) तीन लड़ों से तिगुना करके बना हुआ होना चाहिए॥१६॥