Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 187 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 187

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 187
Shloka
गुरुपत्नी तु युवतिर्नाभिवाद्येह पादयोः। पूर्णविंशतिवर्षेण गुणदोषौ विजानता॥

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Subject
युवती गुरुपत्नी के चरणस्पर्श का निषेध
Meaning
(पूर्णविंशतिवर्षेण) जिसके बीस वर्ष पूर्ण हो चुके हैं ऐसे (गुणदोषौ विजानता) गुण और दोषों को समझने में समर्थ युवक शिष्य को (युवतिः गुरुपत्नी तु) जवान गुरुपत्नी का (पादयोः न अभिवाद्या) चरणों का स्पर्श करके अभिवादन नहीं करना चाहिए [अर्थात् बिना चरणस्पर्श किये हो, उसका अभिवादन करे। उसकी विधि २|१९१ में वर्णित है]॥१८७॥