Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 180 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 180

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 180
Shloka
गुरोर्गुरौ सन्निहिते गुरुवद्वृत्तिं आचरेत्। न चानिसृष्टो गुरुणा स्वान्गुरूनभिवादयेत्॥

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Subject
गुरु के गुरु से गुरुतुल्य आचरण
Meaning
(गुरोः गुरौ सन्निहिते) गुरु के भी गुरु यदि समीप आ जायें तो (गुरुवत् (वृत्तिम् प्राचरेत्) उनसे अपने गुरु के समान ही आचरण करे (च)(स्वान् गुरून्) अपने माता-पिता ग्रादि गुरुजनों के आने पर (गुरुणा अनिसृष्ट: न अभिवादयेत्) गुरु से आदेश पाये बिना अभिवादन न करे अर्थात् शिष्टता के नाते गुरु से पहले अनुमति लेकर उनके पास अभिवादन के लिए जाये ॥१८०॥