Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 18 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 18

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 18
Shloka
मुञ्जालाभे तु कर्तव्याः कुशाश्मन्तकबल्वजैः। त्रिवृता ग्रन्थिनैकेन त्रिभिः पञ्चभिरेव वा॥

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Subject
मेखलाओं का विकल्प
Meaning
(मुखालाभे तु) यदि उपर्युक्त मूंज आदि न मिलें तो [क्रमश:] (कुशअश्मन्तक - बल्वजैः) कुश, अरमन्तक और बल्वज नामक घासों से (तिवृता) उसी प्रकार तिगुनी = तीन बटों वाली करके (एकेन ग्रन्थिना) फिर एक गांठ लगाकर (वा) अथवा (त्रिभिः पञ्चभिः एव) तीन या पांच गांठ लगाकर (कत व्याः) मेखलाएं बनानी चाहिएं॥१८॥