Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 179 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 179

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 179
Shloka
गोऽश्वोष्ट्रयानप्रासाद प्रस्तरेषु कटेषु च। आसीत गुरुणा सार्धं शिलाफलकनौषु च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(गो + अश्व + उष्ट्रयान-- प्रासादप्रस्तरेषु) बैलगाड़ी, घोड़ागाड़ी, ऊंटगाड़ी पर और महलों अथवा घरों में बिछाये जाने वाले बिछौनों पर (च) धौर (कटेषु) चटाईयों पर (च) तथा (शिला-फलकनौषु) पत्थर, तख्ता, नौका पर (गुरुणा साधं आसीत) गुरु के साथ बैठ जाये ॥१७९॥