Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 178 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 178

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 178
Shloka
प्रतिवातेऽनुवाते च नासीत गुरुणा सह। असंश्रवे चैव गुरोर्न किं चिदपि कीर्तयेत्॥

Bhashya

Meaning
(प्रतिवाते) गुरु की ओर से शिष्य की ओर आने वाली हवा में (च) और (अनुवाते) शिष्य की ओर से गुरु की ओर जाने वाली हवा में (गुरुरणा सह न आसीत) शिष्य गुरु के साथ न बैठे (च) तथा (गुरोः असंववे एव) जहां गुरु अच्छी प्रकार न सुनाई पड़े ऐसे स्थान में (किंचित् अपि न कीर्त्तयेत्) कुछ बात को न करे ॥१७८॥