Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 177 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 177

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 177
Shloka
दूरस्थो नार्चयेदेनं न क्रुद्धो नान्तिके स्त्रियाः। यानासनस्थश्चैवैनं अवरुह्याभिवादयेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(एनम्) शिष्य अपने गुरु को (दूरस्थ:) दूर से (न अर्चयेत्) नमस्कार न करे (न क्रुद्धः) न क्रोध में (न स्त्रियाः अन्तिके) जब अपनी स्त्री के पास बैठे हों न उस स्थिति में जाकर अभिवादन करे (च) और (यान +आसनस्थः) यदि सवारी में बैठा हो तो (अवरुह्य) उतरकर (एनम्) अपने गुरु को (अभिवादयेत्) अभिवादन करे ॥१७७॥