Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 175 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 175

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 175
Shloka
गुरोर्यत्र परिवादो निन्दा वापि प्रवर्तते। कर्णौ तत्र पिधातव्यौ गन्तव्यं वा ततोऽन्यतः॥

Bhashya

Meaning
(यत्र) जहां (गुरोः परीवादः वाऽपि निन्दा प्रवर्त्तते) गुरु की बुराई अथवा निन्दा हो रही हो (तत्र) वहां (कर्णी पिधातव्यौ) अपने कान बन्द कर लेने चाहिएं अर्थात् उसे नहीं सुनना चाहिए (वा) अथवा (ततः अन्यतः गन्तव्यम्) उस जगह से कहीं अन्यत्र चला जाना चाहिए ॥१७५॥