Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 173 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 173

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 173
Shloka
नीचं शय्यासनं चास्य नित्यं स्याद्गुरुसन्निधौ। गुरोस्तु चक्षुर्विषये न यथेष्टासनो भवेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(गुरुसन्निधौ) गुरु के समीप रहते हुए (अस्य) इस ब्रह्मचारी का (शय्या + आसनम्) बिस्तर और आसन (सर्वदा) सदा ही (नीचम्) नीचा या सामान्य रहना चाहिए (गुरोः तु चक्षुः विषये) और गुरु की आंखों के सामने (यथेष्टासन: न भवेत्) कभी मनमाने आसन से न बैठे ॥१७३॥