Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 172 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 172

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 172
Shloka
पराङ्मुखस्याभिमुखो दूरस्थस्यैत्य चान्तिकम्। प्रणम्य तु शयानस्य निदेशे चैव तिष्ठतः॥

Bhashya

Meaning
(पराङ्मुखस्य अभिमुखः) गुरु यदि मुँह फेरे हों तो उनके सामने होकर (च) और (दूरस्थस्य अन्तिकम् एत्य) दूर खड़े हों तो पास जाकर (शयानस्य तु) लेटे हों (च) और (निदेशे एव तिष्ठतः) समीप ही खड़े हों तो (प्रणम्य) हाथ जोड़कर बातचीत करे ॥१७२॥