Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 171 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 171

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 171
Shloka
आसीनस्य स्थितः कुर्यादभिगच्छंस्तु तिष्ठतः। प्रत्युद्गम्य त्वाव्रजतः पश्चाद्धावंस्तु धावतः॥

Bhashya

Meaning
(आसीनस्य स्थितः) बैठे हुए गुरु से खड़ा होकर (तिष्ठतः तु अभिगच्छन्) खड़े हुए गुरु के सामने जाकर (आव्रजतः तु प्रति + उद्गम्य) अपनी ओर आते हुए गुरु से उसकी ओर शीघ्र आगे बढ़कर (धावतः तु पश्चात् धावन्) दौड़ते हुए के पीछे दौड़कर (कुर्यात्) प्रतिश्रवण और बातचीत [२ | १७०] करे॥१७१॥