Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 17 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 17

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 17
Shloka
मौञ्जी त्रिवृत्समा श्लक्ष्णा कार्या विप्रस्य मेखला। क्षत्रियस्य तु मौर्वी ज्या वैश्यस्य शणतान्तवी॥

Bhashya

Subject
मेखला-विधान
Meaning
(विप्रस्य) ब्राह्मण की (मेखला) मेखला= तगड़ी (मौञ्जी) 'मूंज' नामक घास की बनी होनी चाहिए (क्षत्रियस्य मौर्वी ज्या) क्षत्रिय की धनुष की डोरी जिससे बनती है उस 'मुरा' नामक घास की, और (वैश्यस्य) वैश्य की (शरणतान्तवी) सन के सूत की बनी हो जो (त्रिवृत् समा) तीन लड़ों को तिगुनी करके (श्लक्ष्णा कार्या) चिकनी बनानी चाहिए ।।१७।।