Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 167 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 167

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 167
Shloka
शरीरं चैव वाचं च बुद्धीन्द्रियमनांसि च। नियम्य प्राञ्जलिस्तिष्ठेद्वीक्षमाणो गुरोर्मुखम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
[ गुरुं के सामने खड़े होने की अवस्था में ब्रह्मचारी] (शरीरं च वाचं च बुद्धि + इन्द्रिय+मनांसि एव च) शरीर, वाणी, ज्ञानेन्द्रियों और मन को भी (नियम्य) वश में करके (गुरोः मुखं वीक्षमाणः) गुरु के सामने देखता हुआ (प्राञ्जलिः) हाथ जोड़कर (तिष्ठेत्) खड़ा होवे ॥१६७॥