Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 166 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 166

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 166
Shloka
चोदितो गुरुणा नित्यं अप्रचोदित एव वा। कुर्यादध्ययने यत्नं आचार्यस्य हितेषु च॥

Bhashya

Meaning
(गुरुणा चोदितः) गुरु के द्वारा प्रेरणा करने पर (वा) अथवा (अप्रचोदितः एव) बिना प्रेरणा किये भी [ ब्रह्मचारी] (नित्यम्) प्रतिदिन (अध्ययने) पढ़ने में (च) और (आचार्यस्य हितेषु) गुरु की हित की बातों में (यत्नं कुर्यात्) यत्न करे ॥१६६॥