Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 161 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 161

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 161
Shloka
दूरादाहृत्य समिधः सन्निदध्याद्विहायसि। सायंः प्रातश्च जुहुयात्ताभिरग्निं अतन्द्रितः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(दूरात् समिधः ग्राहृत्य) दूरस्थान ग्रर्थात् जंगल आदि से समिधाए लाकर (विहायसि संनिदध्यात्) उन्हें खुले [-हवादार] स्थान में रख दे (ताभिः) और फिर उनसे (अतन्द्रितः) आलस्य रहित होकर (सायं च प्रातः) सांयकाल और प्रातःकाल दोनों समय (अग्निं जुहुयात्) अग्निहोत्र करे ॥१६१॥