Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 160 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 160

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 160
Shloka
सर्वं वापि चरेद्ग्रामं पूर्वोक्तानां असंभवे। नियम्य प्रयतो वाचं अभिशस्तांस्तु वर्जयेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(पूर्वोक्तानाम् असंभवे) पूर्व [२|१५८-१५६] कहे हुए घरों के प्रभाव में (सर्वं वा अपि ग्रामं चरेत्) सारे ही गांव में भिक्षा मांग ले (तु) किन्तु (प्रयतः) प्रयत्नपूर्वक (वाचं नियम्य) अपनी वाणी को नियन्त्रण में रखता हुआ (अभिशस्तान्) पापी व्यक्तियों को (वर्जयेत्) छोड़ देवे अर्थात् पापी लोगों के सामने किसी भी अवस्था में भिक्षा-याचना के लिए वाणी न खोले ॥१६०॥