Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 16 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 16

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
2/16
Adhyay 2 Shloka 16
Shloka
कार्ष्णरौरवबास्तानि चर्माणि ब्रह्मचारिणः। वसीरन्नानुपूर्व्येण शाणक्षौमाविकानि च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वर्णानुसार मृगचर्मों क विधान
Meaning
(ब्रह्मचारिणः) तीनों वर्गों के ब्रह्मचारी (आनुपूर्व्येण) क्रमश: (काणंरौरववास्तानि चर्माणि) [आसन के रूप में बिछाने के लिए] काला मृग, रुरुमृग और बकरे के चर्म को (च) तथा [ओढ़ने-पहरने के लिए] (शारण-क्षौम आविकानि) सन, रेशम और ऊन के वस्त्रों को (वसीरन्) धारण करें॥१६॥