Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 159 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 159

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 159
Shloka
गुरोः कुले न भिक्षेत न ज्ञातिकुलबन्धुषु। अलाभे त्वन्यगेहानां पूर्वं पूर्वं विवर्जयेत्॥

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1 Bhashyas
Subject
भिक्षा सम्बन्धी नियम
Meaning
ब्रह्मचारी (गुरोः कुले न भिक्षेत) गुरु के परिवार में भिक्षा न मांगे (ज्ञाति कुल- बन्धुषु न) सम्बन्धियों के परिवारों तथा मित्रों धनिकों में भी भिक्षा न मांगे (अन्यगेहानां अलाभे तु) अन्य घरों से यदि भिक्षा न मिले तो (पूर्व-पूर्वं विवर्जयेत्) पूर्व-पूर्व घरों को छोड़ते हुए भिक्षा प्राप्त कर ले अर्थात् पहले मित्रों,परिचितों या घनिष्ठों के घरों से भिक्षा मांगे, वहां न मिले तो सम्बन्धियों में, बहां भी न मिले तो गुरु के परिवार से भिक्षा मांग सकता है ॥१५९॥