Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 157 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 157

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 157
Shloka
उदकुम्भं सुमनसो गोशकृन्मृत्तिकाकुशान्। आहरेद्यावदर्थानि भैक्षं चाहरहश्चरेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(उदकुम्भम्) पानी का घड़ा (सुमनसः) फूल (गोशकृत्) गोबर (मृत्तिका) मिट्टी (कुशान्) कुशात्रों को (यावत् अर्थानि) जितनी आवश्यकता हो उतनी ही (आहरेत्) लाकर रखे (च) और (भक्षम्) भिक्षा भी (ग्रहः अहः चरेत्) प्रतिदिन-प्रतिदिन मांगे ॥१५७॥