Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 153 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 153

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 153
Shloka
अभ्यङ्गं अञ्जनं चाक्ष्णोरुपानच्छत्रधारणम्। कामं क्रोधं च लोभं च नर्तनं गीतवादनम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
शुक्तानि यानि (अभ्यंगम्) अंगों का मर्दन - बिना निमित्त उपस्थेन्द्रिय का स्पर्श (अक्ष्णो: च अञ्जनम्) आंखों में अञ्जन (उपानत-छत्र-धारणम्) जूते और छत्र का धारण (कामं क्रोघं लोभं च) काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय, शोक, ईर्ष्या, द्वेष चकार से मोह, भय, शोक, ईर्ष्या, द्वेष का ग्रहण किया है । (च) और (नर्त्तनं गीत-वादनम्) नाच, गान, बजाना 'इनको भी छोड़ देवे' यह पूर्वश्लोक से अनुवृत्ति प्राती है ॥१५३॥