Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 15 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 15

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 15
Shloka
नैतैरपूतैर्विधिवदापद्यपि हि कर्हि चित्। ब्राह्मान्यौनांश्च संबन्धान्नाचरेद्ब्राह्मणः सह॥

Bhashya

Subject
व्रात्यों के साथ सम्बन्धविच्छेद का कथन
Meaning
(ब्राह्मण:) द्विजों में कोई भी व्यक्ति (एतैः अपूतैः सह) इन पतितों के साथ (कहिचित आपद्यपि हि) कभी आपत्काल में भी (विधिवत्) नियमपूर्वक (ब्राह्मान्) विद्याध्ययन अध्यापन सम्बन्धी (च) और (यौनान्) विवाह सम्बन्धी (सम्बन्धान्) व्यवहारों को (न आचरेत्) न करे॥१५॥