Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 143 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 143

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 143
Shloka
योऽनधीत्य द्विजो वेदं अन्यत्र कुरुते श्रमम्। स जीवन्नेव शूद्रत्वं आशु गच्छति सान्वयः॥

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Subject
वेदाभ्यास के विना शूद्रत्वप्राप्ति
Meaning
(११३) (यः द्विजः) जो ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य (वेदम् अनधीत्य) वेद को न पढ़कर (अन्यत्र श्रमं कुरुते) अन्य शास्त्र में श्रम करता है (सः) वह (जीवन एव). जीवता ही (सान्वयः) अपने वंश के सहित ++ (शूद्रत्वं गच्छति) शुद्रपन को प्राप्त हो जाता है॥१४३॥(सं० वि० वेदारम्भ सं०)