Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 142 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 142

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 142
Shloka
आ हैव स नखाग्रेभ्यः परमं तप्यते तपः। यः स्रग्व्यपि द्विजोऽधीते स्वाध्यायं शक्तितोऽन्वहम्॥

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Meaning
(यः द्विजः) जो द्विज (स्रग्वी-अपि) माला धारण करके (३।३) अर्थात् गृहस्थी होकर भी (यन्त्रहम्) प्रतिदिन (शक्तितः स्वाध्यायम् अधीते) पूर्ण शक्ति से अर्थात् अधिक से अधिक प्रयत्नपूर्वक वेदों का अध्ययन करता रहता है (स:) वह (आह एव) निश्चय हो (नखाग्रेभ्यः) पैरों के नाखून के अग्रभाग तक अर्थात्, पूर्णतः (परमं तपः तप्यते) श्रेष्ठ तप करता है ॥१४२॥