Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 140 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 140

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 140
Shloka
तपोविशेषैर्विविधैर्व्रतैश्च विधिचोदितैः। वेदः कृत्स्नोऽधिगन्तव्यः सरहस्यो द्विजन्मना॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वेदाध्ययन के लिए प्रयत्न करने का विधान एवं उसका कारण तथा प्रशंसा
Meaning
(द्विजन्मना) द्विजमात्र को (विधिचोदितः तपोविशेषः च विविधैः व्रतैः) शास्त्रों में विहित विशेष तपों [ ब्रह्मचर्यपालन, प्राणायाम, द्वन्द्वसहन आदि] और विविध व्रतों [२ । १४६-१६४ में प्रदर्शित ] का पालन करते हुए (कृत्स्न: वेदः) सम्पूर्ण वेदज्ञान को (सरहस्य:) रहस्य पूर्वक अर्थात् गूढार्थज्ञान-चिन्तनपूर्वक (अधिगन्तव्यः) अध्ययन करके प्राप्त करना चाहिए॥१४०॥