Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 14 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 14

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 14
Shloka
अत ऊर्ध्वं त्रयोऽप्येते यथाकालं असंस्कृताः। सावित्रीपतिता व्रात्या भवन्त्यार्यविगर्हिताः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
व्रात्य-लक्षण
Meaning
(यथाकालं असंस्कृताः) निर्धारित समय पर संस्कार न होने पर (अत:+ऊर्ध्वं म्) इस [२ | १३] अवस्था के बीतने के बाद (एते त्रयः + अपि) ये तीनों [ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य ] ही (सावित्रीपतिताः) सावित्री यज्ञोपवीत से पतित हुए (आर्यविगहिताः) प्रार्य = श्रेष्ठ व्यक्तियों द्वारा निन्दित (व्रात्याः भवन्ति) 'व्रात्या' [= व्रत से पतित ] हो जाते हैं॥१४१॥