Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 139 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 139

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 139
Shloka
अनेन क्रमयोगेन संस्कृतात्मा द्विजः शनैः। गुरौ वसन्सञ्चिनुयाद्ब्रह्माधिगमिकं तपः॥

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(अनेन क्रमयोगेन) इसी प्रकार से [उपर्युक्त निर्देशों के अनुसार ] (संस्कृतात्मा द्विजः) कृतोपनयन द्विज कुमार और ब्रह्मचारिणी कन्या (शनैः) धीरे-धीरे (ब्रह्माधिगमिकं तपः) वेदार्थ के ज्ञानरूप उत्तम तप को (संचिनुयात्) बढ़ाते चले जायें॥१३९॥